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कविता: आजादी (चित्रेश छिपा, हमीरगढ़, भीलवाड़ा, राजस्थान)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार चित्रेश छिपा की एक कविता  जिसका शीर्षक है आजादी ":

कमजोर ना समझना

मेरे फौजी को

पल भर मे नर्क पहुँचाते हैं

अपनी देशभक्ति दिखाने को

हँसते हँसते  मर मिट जाते हैं

आजाद भारत के

आसमा के नीचे

जो आज खुशी हम मनाते हैं

शहीदों की सजी चिताओं से

   ये दिन हम आज देख पाते हैं

 

खून से लथपत काया को

जब माँ सीने से लगाती हैं

देश भक्ति के रंग से

वो भी रंगी चली जाती हैं

 

तीन रंगो से सजा तिरंगा

जब देह पर लिपट जाता है

बुढे बाप का सीना भी

56 इंची हो जाता हैं

 

ऐसे ही नहीं मिली आजादी

कितनों ने कोढ़े जेले थे

भगतसिंह राजगुरु सुखदेव भी

हँसते हँसते फंदो पर झूले थे

      जय हिंद । जय भारत

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