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कविता: मेरा भारत महान (एस के कपूर "श्री हंस", बरेली, उत्तर प्रदेश)


पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार एस के कपूर "श्री हंस" की एक कविता  जिसका शीर्षक है “मेरा भारत महान":

मुक्तक माला।।।।।।।।।।।।।

संख्या।।।।1।।।।।।।।।।।।।।

हिन्दू  मुस्लिम     सिख   ईसाई

बस एक नाम देना है।

हैं एक देश  की      संतानें  बस

उसी को मान देना है।।

इतनी महोब्बत   हो    कि  नाम

नफरत का मिट जाये।

हम सब हैं भारत    वासी    बस

यही   पैगाम  देना है।।

संख्या।।।।।।।।।2।।।।।।।।।।

विश्व के शिखर पर हमेंअब भारत

का      नाम    चाहिये।

चोटी पर  लहराता   तिरंगा  ऊंचा

आलीशान      चाहिये।।

चाहिये  वही  पुरातन   विश्व   गुरु

का   दर्जा   भारत   को।

फिर से वही हमें सोने की चिड़िया

वाला हिंदुस्तान चाहिये।।

संख्या।।।।।3।।।।।।।।।।।

शत शत नमन.   उन.   शहीदों को

जो देश पर कुर्बान हो गये।

वतन के लिए.   होकर.   बलिदान

वह बस बे जुबान हो गये।।

उनके प्राणों की     कीमत   पर ही

सुरक्षित  है  देश   हमारा।

वह जैसे    जमीन ऊपर    उठ कर

आसमान        हो    गये ।।

संख्या।।।।।।।4।।।।।।।।

अम्बर के  उस  पार.     जाना  है

नया हिंदुस्तान बनाना है।

भारत   के   गौरव     चंद्रयान  से

चाँद को छू कर आना है।।

अंतरिक्ष की  उड़ान.  से.   सम्पूर्ण

मानवता को दिया संदेश।

बस दुनिया.   भर    में  भारत  को

हमें महान कहलाना  है।।

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