पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार ऋषि कुमार दीक्षित की एक कविता जिसका शीर्षक है “अतुल्य भारत":
शत्रु बदला, सीमा बदली,
बदल गया है 'अतुल्य भारत',
जैसे था अब तैसा नहीं है,
बन गया दूजा 'अतुल्य भारत'।
संस्कृति भारतीय सुख शांति मय,
आदि से ही देते अतिथि सम्मान,
सम्मान की सीमा होगी तब तक,
साथ रहोगे मिलकर जब तक।
अहिंसा से प्रेम है करते,
शस्त्र, शास्त्रों की भी पूजा करते,
त्याग अहिंसा सीख गए हम,
आने संकट पर, लोगों के प्राण।
प्रथम बार हम कुछ ना बोलते,
वार्तालाप का विकल्प खोजते,
सीमा पार होने पर सोचते,
शत्रु को उसकी भाषा में बोलते।
वीर यहां के 'मात्र भक्त ',
शत्रु के लिए अत्यंत सख्त,
करने अपने प्राण न्योछावर,
रहते सदा हरदम तैयार।
वीर वही जो सम्मुख लड़ता,
अन्यथा वो कायर कहलाता,
वीर सपूतों की यह माटी,
यह है महान 'अतुल्य भारत'।


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