पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार अर्चना विश्वकर्मा की एक कविता जिसका शीर्षक है “आजादी का मतलब":
आजादी के 73 साल
बाद भी
क्या समझ पाए
आजादी का मतलब हम?
पहले ब्रिटिशों
के गुलाम थे!
आज स्वतंत्रता
प्राप्ति के बाद भी
अपनों के ही
गुलाम है।
पहले रंग भेद के
जरिये गोरों ने हमें दबाया,
आज अपनो ने ही
जाति- धर्म के जरिये हमें बांटा ।
जो भारत पहले
पहचान था एकता का
वही भारत आज झेल
रहा है दंश अनेकता का।
संभलो मेरे
देशवासियों
समझों तीरंगे की
शान,
वीरों ने बलिदान
देकर
रखी है इसकी मान।
जातिवाद, धर्मवाद ने हमारी बुद्धि को भ्रमित किया है
चंद लोगों ने
स्वार्थवश, हमें आपस में लड़वाया है।
आजादी के 73 साल
बाद भी
क्या समझ पाए
आजादी का मतलब हम?


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