Welcome to the Official Web Portal of Lakshyavedh Group of Firms

कविता: मेरा प्यारा वतन वही है नाम है जिसका हिन्दुस्तान (रविकान्त सनाढ्य , भीलवाड़ा, राजस्थान)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार रविकान्त सनाढ्य की एक कविता  जिसका शीर्षक है मेरा प्यारा वतन वही है नाम है जिसका हिन्दुस्तान":

नभ में बरसों से फहराए जिसके ध्वज औ भव्य निशान,

गूँज रहे हैं तुमुल स्वरों में हो प्रशस्त जिसके जयगान ।

है अक्षय किरीट हिमगिरि अरु

माँ गंगा  पा वन गतिमान ।

युगों - युगों से चरण पखारे

सागर है जिसका अभिमान ।

वही हमारा प्यारा अभिनव

वतन नाम है हिन्दुस्तान ।

राणा वीर शिवाजी  पुंगव

भगतसिंह हैं जिसकी शान ।

आज़ादी हित शेखर बिस्मिल

हुए जहाँ अगणित बलिदान !

जहाँ विवेकानंद  सरीखे

अगणित मनीषियों की खान ।

है सुभाष गाँधी नेहरू का

निर्मिति हित पूरा अवदान ।

भूल न पाएँ हम पटेल को

कलाम कर्मठ हुए महान ।

नभ में गूँजे बरसों से जय

जय -निनाद जय हिन्दुस्तान ।

वतन हमारा प्यारा भारत

जिसकी दुनिया में है शान ।

बरसों से नभ में गूँजें हैं

जिसके जयकारे अरु जयगान

मेरा प्यारा वतन वही है

नाम है जिसका हिन्दुस्तान ।।

Post a Comment

0 Comments