पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार नूतन गर्ग की एक कविता जिसका शीर्षक है “भारत माता की संतान":
मैं चाहे किसी भी जाति की होऊँ,
किसी भी प्रांत की होऊँ,
मेरी सिर्फ़ है एक ही पहचान,
मैं हूँ भारत माता की संतान।
मिलकर सब धर्मों ने,
जैसे दिलाई थी आज़ादी,
वैसे ही आज सब मिलकर,
करेंगे सपना अखंड भारत का पूरा।
भारत एक ऐसा देश है,
जहाँ मिलता सबको अधिकार बराबर,
ना कोई छोटा, ना कोई बड़ा,
सब हैं एक ही बगिया के फूल।
हम क्यों बाँटे इसको गुटों में?
यह हमारा प्यारा भारत है,
ना मिटने देंगें इसकी शान हम,
हम ऐसे भारतवासी हैं।
जिसकी धरती पर हमने जन्म लिया,
उसने माँ बनकर हमारा पालन किया,
तो क्यों ना बेटा-बेटी बनकर?
आज़ उसका ऋण चुकाया जाय!
आज़ है पंद्रह अगस्त का दिन,
शहीदों की क़ुर्बानी का दिन,
देते हैं उनको मिलकर सलामी हम,
जिनकी वजह से खुली हवा में साँस ले रहे हम।
जय हिंद-जय भारत
बंदे मातरम्


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