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कविता: एक सफर ऐसा भी (निशा गुप्ता, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार निशा गुप्ता की एक कविता  जिसका शीर्षक है “एक सफर ऐसा भी":

एक सफर ऐसा भी

सोचा ना था चेहरे पे चेहरा होगा,

हर मुखौटो पे राज गहरा होगा !!!

 

एक सफर ऐसा भी

साड़ी और पल्लुओं मे मुझको रखा जाएगा, 

फिर भी लाख कमियाँ ही गिनाया जाएगा !

 

एक सफर ऐसा भी

जरुरत पे मुझे याद किया जाएगा,

काम निकलते ही छुरा भोंक दिया जाएगा !

 

एक सफर ऐसा भी

तकलीफ मे कोई ना हाथ बढ़ाएगा,

दाने के कण -कण को तरसाएगा !

 

एक सफर ऐसा भी

जो खुद को साबित करने बाहर कदम  बढ़ाया जाएगा,

तो लांछनो का पिटारा चुन चुन के गिनाया जाएगा !

 

एक सफर ऐसा भी

हर किसी को अब खटखने लगेंगे,

क्युकी अब अपने लिए ही जीने लगेंगे !

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