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कविता: श्रद्धा सुमन.... (विनीता सिंह चौहान, इंदौर, मध्यप्रदेश)


पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार विनीता सिंह चौहान की एक कविता  जिसका शीर्षक है श्रद्धा सुमन....": 

आजादी का बिगुल बजाने वालों को!

देश के खातिर मिट जाने वालों को !

सीमाओं में तत्पर रहने वालों को!

देश के खातिर कुर्बानी देने वालों को!

आओ समर्पित करें श्रद्धा सुमन....

आओ समर्पित करें श्रद्धा सुमन....

 

देश उत्थान का मार्ग प्रशस्त हो,

असहिष्णुता खत्म हो कायम हो अमन।

विश्व बंधुत्व के सूत्र में बंध जाए,

सद्भावना के फूलों से महके चमन।

बुराई पर अच्छाई की जीत हो,

आंतकवादिता का हो जाए दमन‌।

देश के खातिर में भी मर जाऊं,

बन जाए तिरंगा मेरा कफन।

आओ समर्पित करें श्रद्धा सुमन....

आओ समर्पित करें श्रद्धा सुमन....

 

खंड खंड भारत फिर एक हो जाए,

पड़ोसी मुल्क व भारत हो जाए एक वतन।

भाई भाई का अब ना बहाये खून,

विश्वबंधुत्व के लिए करो जतन।

एकता के सूत्र में सब बंध जाए,

सद्भावना कुसुम से महके चमन।

आओ समर्पित करें श्रद्धा सुमन....

आओ समर्पित करें श्रद्धा सुमन....

 

देशवासी एकमत एक विचार हो,

सुख शांति का संकल्प लें!

असमानता खत्म हो सद् विचार हो,

देश की तरक्की का विकल्प दें!

कोरोना वायरस देश से भागे

महामारियों का हो जाए दमन‌।

आओ समर्पित करें श्रद्धा सुमन....

आओ समर्पित करें श्रद्धा सुमन....

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