पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार कौस्तुभ मिश्रा की एक देशभक्ति कविता जिसका शीर्षक है "स्वतंत्र भारत":
मिली आज़ादी हिन्द
को जिस पर
वो व्यर्थ लगती
क़ुरबानी,
अत्याचार जब करते
जयचंद तो
पृथ्वी, राणा, पांडेय की
दोहराती क्यों नहीं कहानी ||
झाँसी की रक्षा
के खातिर
अकेली वो लड़ी
मर्दानी ,
अब वो ज्वाला
क्यों नहीं जलती
जब शोषित होती
नारी ||
इतिहास रच गए जो
वो आज़ाद,भगत सिंह,बिस्मिल
बुजदिल भी दिलेर
हो गये
इनकी शौर्य गाथाए
सुन कर ||
हत्या थी या थी
दुर्घटना
हुआ नहीं इसका
बोध
सत्ता मध में भेट
चढ़ गए
पटेल, शास्त्री, बोस ||
वीरो के बलिदान, रक्त से
सींचा गया जो
झंडा
मेरी आखिरी इच्छा
मुझको
कफ़न में मिले तिरंगा||


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