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कविता: स्वतंत्र भारत (कौस्तुभ मिश्रा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)

 


पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार कौस्तुभ मिश्रा की एक देशभक्ति कविता  जिसका शीर्षक है "स्वतंत्र भारत":

मिली आज़ादी हिन्द को जिस पर

वो व्यर्थ लगती क़ुरबानी,

अत्याचार जब करते जयचंद तो

पृथ्वी, राणा, पांडेय की

दोहराती  क्यों नहीं कहानी ||

 

झाँसी की रक्षा के खातिर

अकेली वो लड़ी मर्दानी ,

अब वो ज्वाला क्यों नहीं जलती

जब शोषित होती नारी ||

 

इतिहास रच गए जो

वो आज़ाद,भगत सिंह,बिस्मिल

बुजदिल भी दिलेर हो गये

इनकी शौर्य गाथाए सुन कर ||

 

हत्या थी या थी दुर्घटना

हुआ नहीं इसका बोध

सत्ता मध में भेट चढ़ गए

पटेल, शास्त्री, बोस ||

 

वीरो के बलिदान, रक्त से

सींचा गया जो झंडा

मेरी आखिरी इच्छा मुझको

कफ़न में मिले तिरंगा||

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