पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार प्रियंका कटारे 'प्रिराज' की एक कविता जिसका शीर्षक है “मेरा भारत सबसे प्यारा हो":
मेरे लहू में भारत बहता है,
हर रोज यही मन कहता है।
'जय हिंद' का मेरा नारा हो,
मेरा भारत सबसे प्यारा हो।
यहाँ हर बेटी आजादी पाए,
हर नारी फिर देवी कहलाये।
हर मानव बंधु हमारा हो,
मेरा भारत सबसे प्यारा हो।
जहाँ भ्रष्टाचार न टिक पाए,
फिर सोने की चिड़िया बन जाये।
ऐसा अब वतन हमारा हो,
मेरा भारत सबसे प्यारा हो।
हर दुश्मन घुटने टेके जहाँ,
कोई नज़र उठा के देखे यहाँ।
बस बिखरा भाईचारा हो,
मेरा भारत सबसे प्यारा हो।
हर गंदी राजनीति भी हारे,
जो अपने लालच को मारे।
अब ऐसा नेतृत्व हमारा हो,
मेरा भारत सबसे प्यारा हो।
यह स्वप्न सदा साकार रहे,
हर दिल में उतना प्यार रहे।
जो सैनिक ने सीमा पर वारा हो,
मेरा भारत सबसे प्यारा हो...
मेरा भारत सबसे
प्यारा हो...


0 Comments