पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार रंजना बरियार की एक कविता जिसका शीर्षक है “तिरंगा अपना":
सहस्र साष्टांग वंदन है,नमन है तुम्हें तिरंगा,
तुमसे हम हैं ,तुमसे ही है समस्त आयाम!
बन ह्रदय तुम करते हम सब का नियोजन,
आत्मा तुम्हीं हो, तुमसे ही हैं पोषित साँसें!
वतन के रक्त वाहिनियों का संचार तुमसे,
सहस्र साष्टांग वंदन है,नमन है तुम्हें तिरंगा!
मातृभूमि के गर्भ से है उत्पन्न वीर असंख्य ,
पले बढ़े सीखे सद्गुण सब मातहत तुम्हारे!
गाड़ आये अपना गौरव पर्वत की चोटी पर,
मिटा देंगे प्राण अपने,नहीं तुम्हें लेश खरोंच!
तत्पर हैं ,शीश नवाये, सुरक्षा में नहीं खोंच,
सहस्र साष्टांग वंदन है,नमन तुम्हें तिरंगा!!
काशमीर से कन्याकुमारी तक,पूरे पूरे है,
संशय नहीं कोई,सब हैं लाल मातृभूमि के!
हो सकती भला कभी सरज़मीं विभाजित ,
भारत माँ के दो लाल हो सकते नहीं विलग!
शूरवीर हैं शीश नवाये , करते अभिनन्दन
सहस्र साष्टांग वंदन है,नमन है तुम्हें तिरंगा!
सरफ़रोशी की तमन्ना अवनि तेरे लाल में है,
खुले आँखें तो वतन की सोंधी ख़ुशबू मिले,
बन्द हो जब आँखें,तो वतन की मिट्टी मिले,
तेरे लाल की बस यही तमन्ना हर हाल में है!
देखना वो काल है जो पाल रहा बैर वतन से!
सहस्र साष्टांग वंदन है,नमन है तुम्हें तिरंगा!


0 Comments