पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार सरिता 'सरस' गोयल की एक कविता जिसका शीर्षक है “भारत देश हमारा":
सुनहरी धरती नीला अम्बर
हर मौसम मस्ताना
खेतो सजी हरी चुनरिया
नदियां गाए अफसाना
सबसे प्यारा देश हमारा
भारत देश हमारा....
सतरंगी रंग माटी तराने गुनगुनाए
हर पर्व अपनी छटा बिखराए
ईद और वैशाखी संग - संग झूमे गाए
लाल किले के मस्तिष्क से तिरंगा गगन लहराए
सबसे प्यारा देश हमारा
भारत देश हमारा.....
सावन के मेलो में धागा अमिट प्रेम बन जाए
होली के रंगों में सारा देश रंग जाए
कभी दीप तो कभी ईदी मिठलाए
सबसे प्यारा देश हमारा
भारत देश हमारा.......
वचनों के खातिर पुत्र वनवास अपनाएं
देश के खातिर हस के फांसी झूलजाए
कही रहीम तो कहीं राम बसेरा
हर मजहब का प्रेम अलबेला
सबसे प्यारा देश हमारा
भारत देश हमारा.......


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