पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार ललित डोभाल की एक कविता जिसका शीर्षक है “ए-जिंदगी तू ही बता मैं कौन हूँ":
ए-जिंदगी तू ही बता मैं कौन हूँ
मतलबी लोगों का अंदाज़ देखकर मैं मौन हूँ
ए-जिंदगी तू ही बता मैं कौन हूँ
किसी उपवन का माली हूँ मैं
किसी समंदर की गहराई हूँ मैं
किसी बाग का खिलता हुआ
इक नवपुष्प हूँ मैं
या किसी डाल की साख का
इक पत्ता हूँ मैं
किसी पुष्प की इत्र की भांति
महकती सी कोई सुगन्ध हूँ मैं
बता क्यों नही देती ए-जिंदगी
कि आखिर कौन हूँ मैं
किसी का हमसफर हूँ मैं
या किसी की आरजू हूँ मैं
या किसी की बिपदा का एक
सहायक हूँ मैं
शायद किसी टोली का एक
नायक हूँ मैं
या फिर किसी गीत का
एक गायक हूँ मैं
किसी पथिक की मंजिल हूँ मैं
या किसी के चेहरे की इक
छोटी सी मस्कुराहट हूँ मैं
आखिर तुम बता क्यों नही देती
ए-जिंदगी कि कौन हूँ मैं
कोई काम करता हुआ एक श्रमिक हूँ मैं
या फिर कोई मेहनतकश इक
किसान हूँ मैं
कोई सच्चा सा पथिक हूँ मैं
कोई अच्छा समाजसेवक हूँ मैं
या फिर कोई लेखक हूँ मैं
आखिर बता ही दे ए-जिंदगी तू
मुझको कि कौन हूँ मैं
किसी की राग द्वेष ईर्ष्या हूँ मैं
या किसी का प्रेम प्रसंग हूँ मैं
किसी की आंख का तारा हूँ मैं
किसी मां का राजदुलारा हूँ मैं
या फिर किसी पिता का
सम्मान हूँ मैं
या किसी बुजुर्ग का मान हूँ मैं
या फिर किसी गाँव का एक
सरपंच हूँ मैं
या फिर सड़क पर रात्रि में
घूमता हुआ एक चोर लुटेरा
डाकू हूँ मैं
या किसी बेबस गरीब की इक
बुलन्द आवाज हूँ मैं
आखिर में बता ही दे तू ए-जिंदगी
कि कौन हूँ मैं


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