पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार निशा गुप्ता की एक कविता जिसका शीर्षक है "किस्मत":
किस्मत ख़राब नहीं था
समय खराब आया था !
लेकिन अभी हौंसला बाकी है
मंजिल पाना अभी बाकी है !
थोड़ा सा लोगो का साथ छूटा है
सांस तो अभी बाकी है !
थोड़ा सा किस्मत रूठा है
आस तो अभी बाकी है!
थोड़ा सा अपनों का औकात दिखा है
लेकिन सब्र का बाँध न टुटा है,
कदम अभी न थका है,
रास्ता अभी न भटका है, क्युकी
दुवाओं का मंजर अभी भी बाकी है !
पटरी पे जिंदगी आने लगा है,
बेपनाह दर्द अब जाने लगा है,
ग्रहण का बादल अब छटने लगा है,
अम्मावश की रात खत्म होने लगी है,
रूठें लोग आने लगे हैं,
मुझे लोग मनाने लगे हैं,
दुवाओं का असर अब होने लगा है,
समय अच्छा अब आने लगा है !
क्युकी, किस्मत ख़राब नहीं था,
समय ख़राब आया था !


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