Welcome to the Official Web Portal of Lakshyavedh Group of Firms

कविता: नफ़रत और मोहब्बत (पुनीत गोयल, पटियाला, पंजाब)


पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार पुनीत गोयल की एक कविता जिसका शीर्षक है "नफ़रत और मोहब्बत":

ये नफ़रत एक गहरी खाई है,
ना जाने ये कहां से आई है,
मोहब्बत रहती है दिल में,
ये उसकी ही लगती परछाई है,
एक ही घर में रहती है ये,
किसी ने नफ़रत किसी ने मोहब्बत की आग जलाई है,
मोहब्बत कम नफ़रत ज्यादा है,
इस की होती नहीं भरपाई है,
जलने वाला अकेला नहीं जलता,
किसी की खुशियां भी उसने जलाईं है,
काश‌ कि मोहब्बत भारी हो जाए नफ़रत से पुनीत,
फिर ये दुनिया होगी वैसी जैसी भगवान ने बनाई है।

Post a Comment

0 Comments