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कविता: प्रेम पहले और आज (राजीव रंजन, गया, बिहार)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार राजीव रंजन की एक कविता जिसका शीर्षक है "प्रेम पहले और आज":

पहले लोग एक-दुसरे से प्यार करते थे,
खत से अपने जज़्बात का इजहार करते थे।
कभी खत्म नहीं होता था लफ्ज़ों का खजाना,
जबकि एक खत में बातें ये हजार करते थे।

पहले लोग एक-दुसरे से प्यार करते थे,
वर्षों एक-दूजे का इंतजार करते थे।
जमाने से डर नहीं,खुद में हया थी जरुर,
छुपते-छुपाते सनम का दिदार करते थे।

पहले लोग एक-दुसरे से प्यार करते थे,
मिलने का वादा हर बार करते थे।
पर मुश्किल से होता था मिलना इनका,
मिलने पर भी बातें ये दो-चार करते थे।

पहले लोग एक-दुसरे से प्यार करते थे,
संग जीने-मरने का इकरार करते थे ।

आजकल का प्यार देखिये —
आजकल लोग इश्क़ में डूब जाते हैं,
करते हैं बात इतना की ऊब जाते हैं।
हर रोज मिलते हैं एक-दुसरे से, 
चिड़ियाघर और रेस्तरां भी खूब जाते हैं।

आजकल लोग इश्क़ में डूब जाते हैं,
वैलेंटाइन में चॉकलेट भी खूब खाते हैं।
एक पल की दूरी नागवार है इनको,
महबूबा के घर मिलने महबूब जाते हैं।
आजकल लोग इश्क़ में डूब जाते हैं–2

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