पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार राजीव रंजन की एक कविता जिसका शीर्षक है "तेरी याद आती है":
तेरी याद आती है,
आँखों में पानी लाती है,
रात-रात भर जगाती है,
मुझे बहुत सताती है,
तेरी याद आती है ।
सावन आ गया है,
हरियाली छा गया है,
मन को भा गया है,
कोयल गीत सुनाती है,
तेरी याद आती है ।
मैंने सुना है ,
नया साथी चुना है,
नया सपना बुना है,
तू मेरा दर्द बढ़ाती है,
तेरी याद आती है ।
ट्यूशन पढ़ने जाना,
मिलने का बहाना,
आइसक्रीम खाना,
भींगते हुए आना,
तेरी यादें मेरी थाती है,
तेरी याद आती है ।
साथ सपने सजाना,
देखकर मुस्कुराना,
मेरे गीत गुनगुनाना,
एक वो भी था जमाना,
भूलकर भी भूली नहीं जाती है,
तेरी याद आती है ।


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