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कविता: वो ही तो भारत है (डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़, हरदा, मध्यप्रदेश)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ की एक कविता  जिसका शीर्षक है “वो ही तो भारत है":

एकता अखंडता खासियत  जिसकी।

वो ही तो भारत है ।

यहां वादियां फुलों की ।

ये ही तो भारत है।

पर्वत हिमालय खड़ा ।

सर बुलंद करके यहां ।

करता निगहबानी ,

जिसकी वो ही तो भारत है ।

धूल हर वक्त जिसने चटाई

दुश्मन को  हमैशा ही ।

जिसके शेर जैसे सिपाही

वो ही तो भारत है ।

महकते हैं हम।

गुंचों की तरह खिलखिलाते हैं,

शहीदों की जो अमानत है

वो ही तो भारत है ।

मांग भी उजड़ी गौदभी,

सूनी हो गई जिनकी ।

जहाँ वीरांगनाएं रहती हैं

मुश्ताक वो ही तो भारत है '

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