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लघुकथा: गारन्टी (रविकान्त सनाढ्य, भीलवाड़ा, राजस्थान)

 पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार रविकान्त सनाढ्य की एक लघुकथा  जिसका शीर्षक है “गारन्टी":

इम्तिहान के नतीज़े आ गए । बच्चों ने सफल होने के लिए भगवान के मंदिरों में मनौती मना रखी थी । कोई शिव जी को प्रसाद चढ़ा रहा था तो कोई हनुमान जी को । कोई वैभव लक्ष्मी माँ को चूनर चढ़ा रहा था तो कोई संतोषी माता को । गाँवों में लेकदेवताओं भैरव जी आदि के यहाँ भी ग्रामीण बच्चों ने मनौती मान रखी थी ।एक भोलेभाले ग्रामीण ने भैरव जी के देवरे (देवालय) में जाकर पूछ की - "अन्नदाता मैं पास होऊँगा या फेल ? कल मेरा रिजल्ट आनेवाला है । अन्नदाता अनपढ़ पुजारी (जिसे गाँववाले भोपा जी कहते हैं) के शरीर में भैरव जी का भाव आ रहा था । उन्होंने गर्दन हिलाते हुए और कंधों पर जोर - जोर से लोहे की साँकल पीटते हुए कहा - भैया, पास फेल तो म्हूँ समझूँ कोनी ! पर तू जठै है, वठै सूँ थन्नै कोई डिगाय सकैगा कोनी । या बात लिखकर रख लै !

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