पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार रविकान्त
सनाढ्य की एक लघुकथा जिसका
शीर्षक है “गारन्टी":
इम्तिहान के नतीज़े आ गए । बच्चों ने सफल होने के
लिए भगवान के मंदिरों में मनौती मना रखी थी । कोई शिव
जी को प्रसाद चढ़ा रहा था तो कोई हनुमान जी को । कोई
वैभव लक्ष्मी माँ को चूनर चढ़ा रहा था तो कोई संतोषी माता को । गाँवों में
लेकदेवताओं भैरव जी आदि के यहाँ भी ग्रामीण बच्चों ने मनौती मान रखी थी ।एक
भोलेभाले ग्रामीण ने भैरव जी के देवरे (देवालय) में जाकर पूछ की - "अन्नदाता मैं पास होऊँगा या फेल ?
कल मेरा रिजल्ट आनेवाला है । अन्नदाता अनपढ़ पुजारी (जिसे गाँववाले
भोपा जी कहते हैं) के शरीर में भैरव जी
का भाव आ रहा था । उन्होंने गर्दन हिलाते हुए और कंधों पर जोर - जोर से लोहे की
साँकल पीटते हुए कहा - भैया, पास फेल तो म्हूँ समझूँ कोनी ! पर तू जठै
है, वठै सूँ थन्नै कोई डिगाय सकैगा कोनी । या बात लिखकर रख लै !

0 Comments