पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार राज कुमार साव की एक लघुकथा जिसका शीर्षक है “मनुष्य और पैसा":
एक ऐसा व्यक्ति था जो वह
दिन और रात को पैसा के लिए सब समय काम किया करता था और वह कभी भी दूसरे
मनुष्यों के तरह घूमने- फिरने नहीं जाता था। किसी ने उससे पूछा , " तुम इतना अधिक काम
क्यों करते हो?" क्या तुम्हें दूसरे लोगों की तरह घूमने- फिरने का मन नहीं
करता है? उसने जवाब दिया, हां मैं चाहता हूं परन्तु मेरे पास समय नहीं है। मुझे मेरे भविष्य के
लिए मुझे पैसा इकठ्ठा करना है। जिससे मेरा आगे का जीवन आराम से कट सके। वह व्यक्ति पैसा
कमाने के चक्कर में अपना सारा जीवन उसी में इस क़दर झोंक दिया कि वह अधिक उम्र होने के
कारण शादी भी नहीं कर पाया। लेकिन अफसोस! वह अभी भी अधिक उम्र होने के कारण कहीं
घूर फिर नहीं सकता और ना ही शादी कर सकता था। उसका पूरा मेहनत पर पानी फिर गया और
यहां तक कि वह जिन पैसों को कमाया था उसका भी ठीक से उपयोग नहीं कर सका।


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