Welcome to the Official Web Portal of Lakshyavedh Group of Firms

कविता: सारे जहा से अच्छा है हिंदुस्तान हमारा (पल्लवी जोशी, बोधगया, बिहार)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार पल्लवी जोशी की एक कविता  जिसका शीर्षक है सारे जहा से अच्छा है हिंदुस्तान हमारा":

सारे जहां से अच्छा है हिंदुस्तान  हमारा

हम बुलबुलें हैं इस भारत मां की पर हर  तरफ से उजाड़ा ये गुलिस्तां हमारा

 

एक तरफ होते है शहीद सैनिक  हजार देश में  हमारे, तो अगले ही पल किसी नुक्कड़ पर किसी की बेटी की इज्जत होती नीलाम यहां,

 

कहीं शैलाब है बाढ़ की तो कहीं सूखे की मार है

देखो नजर उठा के ऑनलाइन दुनिया से तो बेहाल हमारे देश के किसान है

 

नजर जो दौड़ाओ देश में युवाओं की पेशानी पर तो उनमें खींची मिलती बेरोजगारी कि लकीर है

आंखो में ख्वाब लिए है घर की लाठी बनने को पर बेबस बिन नौकरी कि युवती, युवक   है,

 

खुदकुशी बन गया जहां एक समाचार है, वृद्धाश्रम में बढ़ती जहा वृद्धों की तादाद है

 

एक तरफ है नारी सशक्त तो अगले ही पल जलती दहेज की आग में , भ्रूणहत्या भी तो बड़े ही उछाल में है

 

कानून भी पलती है  अब जहां अमीरों की गोद में

दंगे भी होते है  यहां की कॉलेज में

 

मोब लिंचिंग भी जहां हो गया अब खेल है

बेमतलब की बातों का ट्रेंड होता है यहां और जो ही मतलब की बाते तो सब मौन होता है यहां

 

घोटाला जहां आम बात है पत्रकारिता भी करता यहां अब सरकार को सलाम है

 

एक तरफ हिन्दू मुस्लिम की जंग बड़ी जोर है तो दूसरी तरफ  अंद्विश्वासो के नाम पर पर पशुओं की बलि चढ़ रही हर रोज है

 

समाज का आइना कहते है जिस चलचित्र को उसमें में modernity के नाम पर नंगी तस्वीर है

और ताजुब की बात ये है कि ऐसे अस्लील अभिनय करने वाले को कहते देश के हीरो हेरोइन है

 

शिक्षा है हर बच्चे का अधिकार पर बना के बाल मजदूर उनका भी शोषण होता यहां

कहीं जूठे प्लेट कहीं ढोते इटो तो कहीं मांगते भीख मिल जायेगे बच्चे यहां

 

अमीर ऊपर बढ़ रहे और गरीब गरीबी की खाई में गिरते ही जा रहे है जहां

सरकार की स्कूलों में  बच्चो की भविष्य लटका है भवर में बस  शिक्षक है जहां के मजे में

 

अनगिनत स्कीमों पड़ी है सरकारी दफ्तर में यहां

तरकी के नाम पर नेता जी की बिल्डिंग चमकती है और राजनीति के नाम पर हमारे देश की रैलियां में करोड़ों  खर्च होते है और रह जाती है जर्जर ढहते  देश के स्कूल भवन हमारा

 

फिर भी सब कहते है सारे जहा से अच्छा ही हिंदुस्तान हमारा

पर हम कहते है हम बुलबुलें है इस भारत मां की हर तरफ से उजाड़ा है ये गुलिस्तां  हमारा

Post a Comment

0 Comments