पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार रंजना मिश्रा की एक कविता जिसका शीर्षक है “आजादी":
परतंत्र गुलामी
से हमने
पाई मुश्किल से
आजादी
यह तो बहुमूल्य
धरोहर है
करना ना इसकी
बर्बादी
इसको पाने के हित
वीरों ने
अपना लहू बहाया
है
निज प्राण धरे
बलिवेदी पर
तब जाकर इसको
पाया है
पूछो जाकर
परिवारों से
जिनने अपने बेटे
खोए
फांसी पाई गोली
खाई
कैसे वो
बिलख-बिलख रोए
ये मातृभूमि अति
पावन है
मत पतित करो इसको
ऐसे
निज स्वार्थ, अहं की ज्वाला में
ये देश भड़कता है
कैसे
ना देश के
टुकड़े-टुकड़े हों
अब यत्न हमें वो
करना है
निज देश प्रेम की
ज्वाला को
प्रत्येक हृदय
में भरना है
हर हाथ तिरंगा
लहराए
पहचान हमारी इससे
है
कुर्बान इसी पर
हो जाएं
दिल जान हमारी
इससे है


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