पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार रविकान्त सनाढ्य की एक कविता जिसका शीर्षक है “मेरा प्यारा वतन वही है नाम है जिसका हिन्दुस्तान":
नभ में बरसों से
फहराए जिसके ध्वज औ भव्य निशान,
गूँज रहे हैं
तुमुल स्वरों में हो प्रशस्त जिसके जयगान ।
है अक्षय किरीट
हिमगिरि अरु
माँ गंगा पा वन गतिमान ।
युगों - युगों से
चरण पखारे
सागर है जिसका
अभिमान ।
वही हमारा प्यारा
अभिनव
वतन नाम है
हिन्दुस्तान ।
राणा वीर
शिवाजी पुंगव
भगतसिंह हैं
जिसकी शान ।
आज़ादी हित शेखर
बिस्मिल
हुए जहाँ अगणित
बलिदान !
जहाँ
विवेकानंद सरीखे
अगणित मनीषियों
की खान ।
है सुभाष गाँधी
नेहरू का
निर्मिति हित
पूरा अवदान ।
भूल न पाएँ हम
पटेल को
कलाम कर्मठ हुए
महान ।
नभ में गूँजे बरसों
से जय
जय -निनाद जय
हिन्दुस्तान ।
वतन हमारा प्यारा
भारत
जिसकी दुनिया में
है शान ।
बरसों से नभ में
गूँजें हैं
जिसके जयकारे अरु
जयगान
मेरा प्यारा वतन
वही है
नाम है जिसका
हिन्दुस्तान ।।


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