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कविता: जवान और नौजवान (मुनमुन ढाली, रांची, झारखंड)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार मुनमुन ढाली की एक कविता  जिसका शीर्षक है जवान और नौजवान":

यह आजादी जो हमने पाई है

बड़ी मुश्किलों से हमारे हिस्से आई है आज़ाद भारत की सर जमीन पर

शहीदों ने प्राण गवाएं हैं

तब जाकर

ये सुकून की आजादी हमने पाई है

गांधी ,सुभाष ,भगत ,बिरसा

जैसे वीरों ने बलिदान दी है

इनकी बलिदानी से हमने यह आजादी पाई है

सीमा पर जो डटा हुआ है

आजाद हिंद पर मर मिटने को जो अड़ा हुआ है

तिरंगा का शान रखेंगे

या

उसी में लिपटा जाएंगे

ये वचन खाई है

उठो नौजवानों आजादी सिर्फ उनका फर्ज नहीं

हमें उनके साथ आज कंधे से कंधा मिलाना है

देश की बागडोर का जिम्मा अब नौजवानों को भी संभालना है

पढ़ो- लिखो

और

देश को नया आयाम दो

आबादी को कम करने की भी जिम्मेदारी उठाओ

मां बाप की सेवा करो 

स्त्री  को पुरा सम्मान दो

कोई गलत करें तो रोको

उसका बहिष्कार करो

स्वदेशी अपनाओ

देश को आत्मनिर्भर बनाओ

दिल में प्रेम भरो

ना हिंदू ना मुसलमान बनो

नौजवान हो तुम इस युग के

देश में एका रखो

फूलों फलो

अद्भुत है यह देश

भांति -भांति की संस्कृतियां

सब को संजो कर रखो

नौजवानों उठो

देश की बागडोर संभालो

सरहद पर वीर जवान हो

देश में वीर नौजवान

भारत हमारा हमेशा रहेगा

सुख, समृद्धि और बलवान।

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