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कविता: गुम है किसी के प्यार में (नीलम सिंह, आसनसोल, पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार नीलम सिंह की एक कविता  जिसका शीर्षक है “गुम है  किसी के प्यार में”:
         
थोड़ा शान्त सा है
बहते नदिया के जल जैसा
थोड़ा खोया - खोया सा है
गुमसुम पुरवाई के जैसा
लगता है कोई रोग लगा है
या खुद से ही कोई जंग लड़ रहा
 
ना जाने ये किस दुनिया में
रहता है बिल्कुल तन्हा - तन्हा
बातें करता है किसी से पर
दिल ढूंढे किसी और को ही
सोचता किसी और को पर
खयालों में छिपा कोई और ही
 
ये हंसता भी है रोता भी है
जागे अंखियों से सोता भी है
कह ना पाए ये दिल की बातें
दिल ही दिल में घुटता भी है
कुछ भूला है शायद इसका
या कुछ अधूरा रह गया
 
कुछ बेहद पास आकर भी
मुठ्ठी से इसके फिसल गया
दिल समझ नहीं पाता कुछ भी
या जानकर भी अनजान बना
हर पल खुद को कोई नया
भुलावा ये देता रहता
कुछ और नहीं ये तो अब
गुम है किसी के प्यार में
हां... गुम है किसी के प्यार में

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