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कविता: जीवन की क्या है परिभाषा ? (शंभू राय, न्यू माल जं●, मालबाजार, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार शंभू राय की एक कविता  जिसका शीर्षक है “जीवन की क्या है परिभाषा ?”: 

जीवन की क्या है परिभाषा ?
कैसे बयां करू मैं,
परिभाषाएं हैं इसकी अनेक
हम सब के साथ चलती है
दो जिंदगी ,
 
एक,
हम जो लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं
और
दूसरी,
हमारे अंतर्मन में दबी
ईच्छा , पीडा़-मनोव्यथा साथ लिए
हमारे साथ चलती है।
 
पर
 
हम निरंतर प्रयासरत रहते हैं
बस इसी आशा में
कि
दूसरी जिंदगी को
बदल सकेंगे एक दिन हम पहली में।
 
अपनी समस्याओं - तकलीफों को
अपनी जिंदगी से दूर कर सकेंगे
और
एक दिन आएगा ऐसा
जब सारा जहां हमें
एक उपवन की तरह
आनंद देने वाला प्रतीत होगा
और
अनुभव कर सकेंगे हम
जीवन के वास्तविक आजादी का ।
 
जीवन की क्या है परिभाषा ?
कैसे बयां करू मैं
परिभाषाएं हैं इसकी अनेक.....!

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