Welcome to the Official Web Portal of Lakshyavedh Group of Firms

कविता: एक सलाम मा के नाम (पिंकी महेता शाह 'दिशा', अमदावाद, गुजरात)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार पिंकी महेता शाह 'दिशा' की एक कविता  जिसका शीर्षक है “एक सलाम मा के नाम”:

 
बहोत सारी दुआए कबूल होती तब जाकर ईन्सान
को मा के झरिये जन्म
लेनेका अवसर मिलता हे
 
ईस धरती पर मुजे लाने के
लिए उठाये हे माने हजार कष्ट तब मुजे मिला हे
मानव बनकर जीने का इष्ट.
 
उंगली पकडकर चलना
शिखाया हे जब भी मुजे
तकलीफ होती थी मा ने
सिने से लगाया था मुजे.
 
जन्म लेने पर सबसे पहेले
मा को देखा था मैनै........
बोलना सीखा जब मैने
"मा"को पुकारा था मैने.
 
कदम कदम पर मैने मा को
अपनी तहेनातमें पाया हमने.
सारी उम्र न्योछावर करती मा
को "ईश्वर"से अधिक माना हमने. 

Post a Comment

0 Comments