पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार पिंकी महेता शाह 'दिशा' की एक कविता जिसका शीर्षक है “एक सलाम मा के नाम”:
बहोत सारी दुआए कबूल होती तब जाकर ईन्सान
को मा के झरिये जन्म
लेनेका अवसर मिलता हे
लिए उठाये हे माने हजार कष्ट तब मुजे मिला हे
मानव बनकर जीने का इष्ट.
शिखाया हे जब भी मुजे
तकलीफ होती थी मा ने
सिने से लगाया था मुजे.
मा को देखा था मैनै........
बोलना सीखा जब मैने
"मा"को पुकारा था मैने.
अपनी तहेनातमें पाया हमने.
सारी उम्र न्योछावर करती मा
को "ईश्वर"से अधिक माना हमने.


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