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कविता: दिवाली (ऋचा प्रकाश, आसनसोल, पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार ऋचा प्रकाश की एक कविता  जिसका शीर्षक है “दिवाली”: 

दिवाली का त्यौहार आया
 
अनेको खुशियों का पैगाम लाया
 
हर घर घर में दिए जलते
 
रंगोलियों से आनन्द बढ़ाते
 
जगमग-जगमग करता यह सारा जहाँ हमारा |
 
 
चौदह वर्ष वनवास काट
 
पुरुषोत्तम राम के आगमन से
 
धूम मची अयोध्या में
 
खुशियों की लहार दौड़ी
 
दुल्हन सी सजी अयोध्या नगरी
 
दिए से स्वागत हुई
 
हर कोने में सत्य की दीप जगमगाती
 
बुराई रूपी अंधकार मिटी
 
वही से ये अनोखी प्रथा चली |
 
 
अनेक खुशियों और उमंगो से 
 
भरी यह त्यौहार 
 
हर्षोल्लास से मनाते
 
छत्त, बाहर, भीतर दिए से सजाते
 
मिठाई, पकवान बनते
 
आतिशबाजियों की गूंज से
 
चमक उठता यह आसमां
 
रौनक लाती सबके चेहरे पर
 
खिल उठता यह सारा जहाँ अपना
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