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कविता: आए दीपावली मनाए (रमनदीप कौर, लुधियाना, पंजाब)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार रमनदीप कौर की एक कविता  जिसका शीर्षक है “आए दीपावली मनाए”:


आए दीपावली मनाए

अंतर्मन के दीप जलाए

घर चौखट को रोशनाए

खुशियों की सौगात घर लाए

बुराइयों को दूर भगाए

घर आंगन को रंगोली से सजाए

घर छत  पर दीप जलाए

अंधकार को दूर भगाए

आए दीपावली मनाए

अंतर्मन के दीप जलाए

पर कोरोना संक्रमण को न भुलाए

इसके डर को न मन से भगाए

दीपावली दूरी रख  मनाए

किसी के नजदीक न जाए

पर मन की दूरी न बड़ाए

जात धर्म के भेद मिटाए

आए दीपावली मनाए

अंतर्मन के दीप जलाए

कोरोना का खौफ खाए

मिठाई देख जी न ललचाए

घर बना खाना ही खाए

सौगात से कोरोना घर न लाए

केवल खुशियों को बढ़ाए

मन में प्रेम के दीप जलाए

आए दीपावली मनाए

अंतर्मन के दीप जलाए......

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