पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार प्रीति साह की एक कविता जिसका शीर्षक है “स्वतंत्रता":
न जाने कितने रक्तों ने मिलकर इस दिन को हैं जन्म दिया,
स्वतंत्रता के खातिर कितनों ने अपने को कुर्बान किया।
उस दिन सर पर कफ़न बांधे हुए जब मौत के पथ पर चलना उन्होंने शुरू किया,
इस आज़ादी भरे जीवन के लिए, अपने को शहीद कर दिया।
अपने जान को देकर जिन्होंने देश का प्राण बचाया था,
तभी इस तिरंगे ने संसार में अपना स्थान पाया था।
भूलकर अपना घर- परिवार जिन्होंने सबकी आजादी का प्रण लिया था,
हर मुश्किल अवस्था में भी अपने को अडिग रखा था।
मानकर देश को अपना सम्मान गर्व करने का कारण हमें दिया था,
भारतमाता की गोद
में खुद को सुलाकर देश का झंडा ऊंचा किया था।


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