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कविता: जिंदगी (निशा गुप्ता, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल)


पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार निशा गुप्ता की एक कविता जिसका शीर्षक है "जिंदगी ":

कभी धुप तो कभी छाँव है जिंदगी-

कभी दर्द मे बहुत जलाती है तो, 

कभी बहुत शीतल देती है जिंदगी 

किताबों के पन्ने की तरह है जिंदगी -

हर दिन नये नये लोगो और किस्सो को

सब पढ़ते हुए पलटते जाते है जिंदगी मे !

बसंत ऋतू के पतझड़ की तरह है जिंदगी -

ना जाने कितने लोग बिछड़ते है और 

ना जाने कितने जुड़ते है जिंदगी मे !

हर पल,हर दिन बदलती है जिंदगी -

गिरगिट भी जितना रंग नहीं बदलती उतना 

तो जिंदगी हर पल नई मोड़ लेती है !

चुनौतियों से भरी हुई है जिंदगी -

सारे गमों को सुलझा के सोते है 

दूसरे दिन नए गम तैयार मिलते है !

कभी अमावश तो कभी पूर्णिमा है जिंदगी -

कभी तो सर पे ताज़ पहना देती है

कभी तो रोटी का मोहताज बना देती है जिंदगी !

हर दिन नया किस्सा है जिंदगी -

हर दिन नया किस्सा मिलता है 

दादियों की कहानियों की तरह !

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