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कविता: आजाद की मातृभूमि (संजय वर्मा "दॄष्टि", शहीद भगत सिंग मार्ग, मनावर, धार, मध्य प्रदेश)

 


 पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार संजय वर्मा "दॄष्टि" की एक देशभक्ति कविता  जिसका शीर्षक है " आजाद की मातृभूमि":

शहीदों की क़ुरबानी से, हुआ देश आजाद हमारा है

लहराता है जब तिरंगा, लगता कितना प्यारा है

*

कश्मीर से कन्याकुमारी तक, भारत को सबने संवारा है

मिली आजादी से भारत , अब लगता कितना प्यारा है

बहती गंगा-जमुना सी नदियाँ , यहाँ की पावन धारा है

लहराता है  जब तिरंगा , लगता कितना प्यारा है

शहीदों की क़ुरबानी से, हुआ देश आजाद हमारा है

*

आजाद होने के लिए सबने  भारत माँ   को  पुकारा है

भारत माँ का वंदन करके, शहीदों ने सब  को तारा है

खुली बेड़ियाँ शहीदों से, अब तो स्वतंत्रता ही सहारा है

 

लहराता है  जब तिरंगा ,लगता कितना प्यारा है

शहीदों की क़ुरबानी से, हुआ देश आजाद हमारा है

*

वन्दे मातरम के नारों को , मिलकर सबने पुकारा है

भारत  के कर्णधारों को , तब भारत माँ ने दुलारा है

"आजाद" की मातृभूमि का, भाभरा कितना प्यारा है

लहराता है जब तिरंगा , लगता कितना प्यारा है

शहीदों की क़ुरबानी से, हुआ देश आजाद हमारा है

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