पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार रविरंजन कुमार नीलय की एक कविता जिसका शीर्षक है “प्रदूषण से आजादी":
बढ़ रहा ग्लोबल वार्मिंग यह मनुष्य का कारनामा है।
बढ़ते प्रदूषण ही क्या विकास का पैमाना है?
बातें करते बड़े-बड़े हम इस धरा को जन्नत हम बनाएंगे
बढ़ रहा प्रदूषण चारों ओर है फिर जन्नत कैसे बनाएंगे?
चारों तरफ फैला पड़ा कूड़े कचरे का हम बाहर हैं।
प्रदूषण ही क्या विकास का आधार है?
बाग -बगइचा, आहार- पोखर ,नहर पइन सब पानी से अनजान है।
खेतों का भी हाल ना पूछो सब पानी बिना सुनसान है
सावन, भादो ,आश्विन बीता पानी का न नाम है
पूछता हूं काका से जब मैं
क्यों खेत पड़ा सुनसान है?
काका जी जवाब देते यही प्रदूषण का काम है।
पानी भी बेमौसम होता,
सब लोग परेशान हैं
किसान भी बेहाल है।
बिहार का भी हाल न पूछो
बाढ़ सुखाड़ से बेहाल है।
प्रदूषण के बढ़ने से हो रहा धमाल है।
नीत नए-नए हो रहे आविष्कार है
मनुष्य की बढ़ती लालसा का
यह सब कमाल है।
नित्य बढ़ रहे तापमान
लोग गर्मी से परेशान हैं।
हमने पाई है आजादी वह मुकम्मल नहीं
और अब पाएंगे आजादी प्रदूषण से।
बनाएंगे सुंदर स्वच्छ इस जहां को
सजाएंगे ,सवारेंगे स्वर्ग जैसा धरा को बनाएंगे
आज हम सब मिलकर यह प्रण कर पाएंगे?
प्रदूषण से आजादी दिलवायेंगे २


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