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कविता: आज़ादी आसान नहीं (शिखा झा, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार शिखा झा की एक कविता  जिसका शीर्षक है आज़ादी आसान नहीं ":

               आज़ादी आसान नहीं थी

               लड़ाईया कई लड़ी गईं

               लाखों वीरों ने , प्राणों की परवाह न कर

               भारत को नई कहानी दी

उन माताओं को भी नमन करे

जिनने अपने प्राण प्रिय सपूत दिए

उनका मस्तक ऊँचा करने

अपने को देश पर कुर्वान किये

                आज़ादी आसान नहीं थी

                आसान हुई लाखों प्राणों से,

                बलिदानों से, माँ के सुने आँचल से

                पिता के उस स्पर्श से,

                बहन के उस राखी के सुने थालो से

हम कर्ज़दार है

यह कर्ज़ चूका सकते नहीं

और राजनैतिक धंधों में पड़कर

यह आज़ादी गवा सकते नहीं ।

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