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कविता: देश के प्रति (वंदना तिवारी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश)


पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार वंदना तिवारी की एक देशभक्ति कविता  जिसका शीर्षक है "देश के प्रति":

चलो देश में देश प्रेम की

शिखा अखंड जलाए

निज से निकलें बाहर

सबकी पीडा़ को अपनाए

 

मुरझाए क्यों प्राण ?

शिथिल क्यों पडी़ _

आज जीवन धारा ?

क्यो प्रभात का सूर्य आज

निकला है इतना अलसाया ?

 

चलो सभी के अंतस में

हम नया सूर्य निमा॔ण करें

कण- कण प्रकाश से_

हो उज्ज्वल

स्वणि॔म आभा विस्तार करें ।

 

आज रहे न कहीं उदासी

कहीं हताशा न उपजे

प्रेम-एकता के परिभाषा की

सार्थकता न टूटे ।

 

कर्म हमारा साध्य बने

आकाश की दूरी कम कर दें

गौरवमय जीवन जीने की

कला सभी को सिखलाए

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