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कविता: जय हो वीर जवान (कल्पना गुप्ता "रतन", जम्मू एंड कश्मीर)

 


पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार कल्पना गुप्ता "रतन" की एक कविता  जिसका शीर्षक है जय हो वीर जवान ":

जय जय हिंदुस्तान ,

जय जय हिंदुस्तान

तेरे वीर सपूतों को प्रणाम

रक्षा करते सीमाओं की

 भारत के वीर जवान

जय जय।।।।।।

 

शत्रु अगर आंख उठाए

हानी मेरे देश को पहुंचाएं

वक्त रुक जाता वहीं

जब तक ना ले ले उसकी जान

जय जय।।।।।।।

 

देश की खातिर किया त्याग

दुश्मन की गोली का किया सामना

रोटी से भी हुए मोहताज

ना आए आंच देश में, किया खुद को कुर्बान।

जय जय।।।।।।।।

 

देश में जब जब विपदा आई

दूर करने दौड़ा, बहादुर सिपाही

ना देखे धर्म ना जात

यही है इसकी सच्ची पहचान।

जय जय।।।।।।।।।

 

कश्मीर हो या कन्याकुमारी

सबकी बिगड़ी तुमने सवारी

गुजरात से अरुणाचल

रक्षा करे तू वायु जल थल

तुझ पर टिका है देश का स्वाभिमान।

जय जय।।।।।।

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