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कविता: मेरा देश महान है (जगदीश प्रसाद महावर, जयपुर, राजस्थान)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार जगदीश प्रसाद महावर की एक कविता  जिसका शीर्षक है मेरा देश महान है":

सब मुल्कों से नेक प्यारा मेरा देश महान है

इनमें बसती सब दुनियां की सद्बुद्धि की खान है

मेरा देश महान है मेरा देश महान है

 

जिसके पावन ह्रदय में रहता निर्मल गंगा धाम है

जिसके चरणों को धोना नित सागर का काम है

मेरा देश महान है.........

 

तपी तपीस्वर तप करते दानी करते दान है

दानी धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती धान है

मेरा देश महान है.... ....

 

सती सावित्री कर्मा जैसे लक्ष्मी बाई महान् है

केसरिया रंग जिनके शोहे वो वीरों की शान है

मेरा देश महान है...…..

 

गीता बाईबल ग्रंथ साहिब रहती कुरान है

राम रहीम ईसा नानक सभी धर्म समान है

मेरा देश महान है........

 

इक दूजे का बनें सहारा मिलकर करते काम है

गांधी साहब बोस शेखर उनके भी नाम है

मेरा देश महान है..........

 

होली राखी तीज दशहरा दीवाली का मान है

क्रिसमस लोहड़ी ईद मुबारक इनकी भी आन है

मेरा देश महान है..…...

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