पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ की एक कविता जिसका शीर्षक है “विस्तृत विशाल":
विस्तृत विशाल
अखंड
हिंदुस्तान
हिंदुस्तान
प्यारा
हिंदुस्तान हमारा ।
प्रफुल्लित करती
ललित लताएं
जिसकी ।
वीर शहीदों और
वीरांगना
माताए जिनकी ।
प्रकृतिक
संस्कृति की ।
सुखद छटाएँ ।
साथ नाचें सब
मिलकर,
धूम मचाएं ।
लहर लहर लगाये ।
देखो तिरंगा
प्यारा ।
सारी दुनिया से
जुदा,
जुदा है भारत
प्यारा ।
नवजवान
खाँयेक़समें
भारत माँ की शान
की ।
माता - पिता दादा
दादी ,
सुनाएँ गाथाएँ
बलिदान की ।
बढ़े चलो बढ़े
चलो ।
दुश्मन को मार
गिराना है ।
छाती पर दुश्मन
की ,
हमको तो चढ़ जाना
है '
भारत माँ की शान बढ़ाना है


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