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कविता: हिन्दी बचाओ फ़र्ज़ निभाओ (भावना ठाकर, बेंगुलूरु, कर्नाटक)

 

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार भावना ठाकर की एक कविता  जिसका शीर्षक है “हिन्दी बचाओ फ़र्ज़ निभाओ:

14 को ही करते सब
हिन्दी का क्यूँ सम्मान है,
अपने ही देश में कुछ लोग
हिन्दी से ही  अन्जान है।
 
शर्मिदा से होते क्यूँ हो
हिन्दी बोलो सबको सिखाओ,
संस्कृति की शान है भैया
हिन्दी हमारी पहचान है।
 
पडोसी के पैंतरे बाज़ सी
अंग्रेजी को लताड़ कर,
हिन्दुस्तानी हिन्दी को
जन-जन तक पहुँचा दो।
 
तुलसी ने जो आन बढ़ाई
कबीर ने है शान बढ़ाई,
राजभाषा के रूप में जिनको
मिला पूरा मान है।
 
निज भाषा को भूलकर क्यूँ
गोद लेते हो पराई को,
गर्व से हर भारतीय बोलो
हिन्दी हमारा अभिमान है।
 
धरोहर को आगे बढ़ाएँ
मिलकर हिन्दी के गुणगान गाए,
देश में साधन संचार का
हिन्दी ही तो आधार है।
 
आओ मिलकर मुहिम चलाए
हिन्दी को सम्मान दिलाए,
बोलकर सिर्फ़ अब हिन्दी हम
हिन्दुस्तानी का फ़र्ज़ बजाएं

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