पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार दुर्गादत पाण्डेय की एक कविता जिसका
शीर्षक है “बदलते सफर”:
वो ऊंचे आसमान को बता दे तू
तू कितना है, बलवान
ये दिखा दे तू,
कितनी है, खिलाफतें
उन्हें मिटा दे तू
कुछ पल के लिए, रुका दे तू
तू आ रहा, रहें ढूढ़ने
समंदर को, खुलकर बता दे तू
में, पूरी तरह
ठहरा दे तू
अपनी सफलता का, परचम
सदियों तक फहरा दे तू
सफर ए मंजिलों के, रोडों को
अपने जज्बे से, हटा दे तू
आग, अब बना दे तू
इन्ही अंगारों, पे हर - पल चलके
सफर को आसान बना दे तू !!


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