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कविता: वह घर स्वर्ग होता है जहाँ होती हैं बेटियां (राखी पटेल, रायपुर, छत्तीसगढ़)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार राखी पटेल की एक कविता  जिसका शीर्षक है “वह घर स्वर्ग होता है जहाँ होती हैं बेटियां
”:
           
हर चुनौती करे हंस के स्वीकार वो होती है बेटियां,
माँ - बाप के हर सांस का अहसास करे वो होती है बेटियाँ,
गांव की पगडंडियों की डगर घर की तरफ मुड़ी रहती हैं,
बेटियां कहीं भी रहे माँ बाप से जुड़ी रहती हैं।
बेटियां घर की "परी" है कोयल सी उसकी बोली,
बेटियाँ है जिस घर में आंगन में रहे रंगोली।
होकर भी धन पराया सच्चा धन अपना,
पराया रहकर भी कर देती है पूरा माँ - बाप का सपना।
गर बेटा साथ देगा माँ - बाप को तो समाधान हैं बेटियां,
दोनों हैं प्यारे माँ - बाप के लिए बेटे और बेटियां।
माना घर का दीपक है बेटा, दो - दो घर को रोशन करती है बेटियां।
उसका घर स्वर्ग है जिसके घर होती है बेटियाँ,
टिका जिनसे परिवार वह बुनियाद हैं बेटियाँ,
एक "झलक" पाने के लिए, मन्नत और फरियाद है बेटियाँ,
तभी तो "जीवन" की संसार होती है बेटियाँ,
निर्जीव धरा पर प्यारी सी झंकार होती है बेटियां।।

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