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कविता: जीवन ही एक संघर्ष होता है (जगदीश प्रसाद महावर, जयपुर, राजस्थान)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार जगदीश प्रसाद महावर की एक कविता  जिसका शीर्षक है “जीवन ही एक संघर्ष होता है”:

जीवन में आगे बढ़ना कहलाता संघर्ष है
वैसे तो जीवन ही एक होता संघर्ष है
 
जीवन में आई उलझनों को सुलझाना ही संघर्ष है
मार्ग में आए रोड़े को झुककर हटाना ही संघर्ष है
होती है कई तरह समायी कुरितियां समाज में
धीरे धीरे कुरितियों से समाज को अलग करना ही संघर्ष है
वैसे तो ........
 
सच्चाई का साथ देने में आयेंगी कई समस्याएं
सच्चाई को पकड़ें रहना ही जीवन का संघर्ष है
अक्सर होता रहता अपने अधिकारों का हनन
अपने अधिकारों के लिए लड़ जाना ही संघर्ष है
वैसे तो .....
 
मंजिल पर आगे बढ़ना भी कहलाता संघर्ष है
मंजिल भी उसको मिलती जो करता संघर्ष है
कुछ नहीं करने से तो जग में मिलती नहीं खुशियां
जीवन में खुशियों के लिए कुछ करना भी संघर्ष है
वैसे तो .......

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