पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार आभा मिश्रा की एक कविता जिसका शीर्षक है “मानवता हुई शर्मसार”:
मानवता शर्मसार
हुई, जब बढ़ा पाप अधर्मो की।
अन्यायी
अत्याचारी, हद हो गई बेशर्मो की।
जिस नारी ने जन्म
दिया, जिसने हैं जीवनदान दिया।
बहन बनी बेटी बनी, पत्नी बन सम्मान किया ।
उस नारी का जीवन
छीन लिया, जीवन छीनों बेरहमो की।
अन्यायी अत्याचरी
हद हो गई बेशर्मो की।
इज्जत रौंदी लूटा
सम्मान ,मन न भरा तो ले ली जान ।
दरिंदों का कैसा
यह अभिमान, नारी का करते हैं अपमान।
जागो और हुंकार
भरो, अब सजा मिले दुष्कर्मो की ।
अन्यायी
अत्याचारी, हद हो गई बेशर्मो की।
कटती गैया लुटती
बिटिया, शासन की अंधी है अखियां ।
चीखे उनको न
सुनाई दे, दिन रात सिसकती है बिटिया ।
अपनी ताकत को
पहचानो ,सर कलम करो कुकर्मों की ।
अन्यायी
अत्याचारी, हद हो गई बेशर्मो की।


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