पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार जगदीश प्रसाद महावर की एक कविता  जिसका शीर्षक है “चाय सा इश्क़ मेरा”: 

चाय सा इश्क़ मेरा जवां होगा
दिल में इक बार फिर फऩा होगा
जां भी निसार यार कर देंगे
प्यार में आंखों से जब नशा होगा
चाय सा इश्क़ .....
 
देखने की सजा फिर क्या होगी
बांहों में दिल जब यार के होगा
माला का जाप त्याग कर देंगे
हाथों में यार का जो हाथ होगा
चाय सा इश्क़ ......
 
गुल का गुलशन हुआ जब देखो
इश्क़ भी आसमां पर गिरां होगा
चांद अब रहा है घट देखो
पूरा जो अब मेरा सनम होगा
चाय सा इश्क़ ........