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कविता: चाय सा इश्क़ मेरा (जगदीश प्रसाद महावर, जयपुर, राजस्थान)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
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चाय सा इश्क़ मेरा जवां होगा
दिल में इक बार फिर फऩा होगा
जां भी निसार यार कर देंगे
प्यार में आंखों से जब नशा होगा
चाय सा इश्क़ .....
 
देखने की सजा फिर क्या होगी
बांहों में दिल जब यार के होगा
माला का जाप त्याग कर देंगे
हाथों में यार का जो हाथ होगा
चाय सा इश्क़ ......
 
गुल का गुलशन हुआ जब देखो
इश्क़ भी आसमां पर गिरां होगा
चांद अब रहा है घट देखो
पूरा जो अब मेरा सनम होगा
चाय सा इश्क़ ........

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