पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार पुनीत गोयल की एक कविता जिसका
शीर्षक है “आज़ाद भारत”:
मुझे बताओ एक बात
क्या सच में हम है आज़ाद
जलन झूठ मकारी फरेब
कर रहे हैं हमको बर्बाद
एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में
बस भागे जा रहे हैं एक राह से दूसरी राह
क्या सच में किसी को है याद
कि भारत कैसे हुआ आज़ाद
कुर्बानियों को तो हम भुल गए हैं
बस दिखावे के लिए नाम याद है
लौटा लाओ मिलकर सब
प्यार वफ़ा विश्वास अपनापन
फिर मनाओ सब आज़ादी
तब होगा सच में पुनीत मेरा भारत देश आज़ाद।
मुझे बताओ एक बात
क्या सच में हम है आज़ाद
जलन झूठ मकारी फरेब
कर रहे हैं हमको बर्बाद
एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में
बस भागे जा रहे हैं एक राह से दूसरी राह
क्या सच में किसी को है याद
कि भारत कैसे हुआ आज़ाद
कुर्बानियों को तो हम भुल गए हैं
बस दिखावे के लिए नाम याद है
लौटा लाओ मिलकर सब
प्यार वफ़ा विश्वास अपनापन
फिर मनाओ सब आज़ादी
तब होगा सच में पुनीत मेरा भारत देश आज़ाद।


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