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कविता: तलाश में (श्वेता कुमारी, धनबाद, झारखंड)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार श्वेता कुमारी की एक कविता  जिसका शीर्षक है “तलाश में”:

क्या-क्या न सहे हमने

सितम तेरे तलाश में,

फिरती रहूँ हर डगर-डगर

तेरे तलाश में,

हो रहा हृदय विदीर्ण मेरा

तेरे तलाश में,

कभी हँसू,कभी रोऊँ

तेरे तलाश में,

भावनाओं की तूफान उठ रही

तेरे तलाश में,

स्वप्न चित्र को लेकर भटकूँ

तेरे तलाश में,

अजीब-सी कशमकश है जिंदगी

तेरे तलाश में,

घर-द्वार सब छूटा

तेरे तलाश में,

दिशाएँ भी विपरीत हुई

तेरे तलाश में,

जीवन न जाने कब कर दे पलायन

तेरे तलाश में,

सपनीला संसार रचना चाहा

तेरे तलाश में,

उम्मीदें बची है अब कुछ

तेरे तलाश में,

पा लूँ मंजिल यही सोच रही

तेरे तलाश में।

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