पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद
पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली
सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत
है। आज आपके सामने प्रस्तुत है
रचनाकार शमा जैन सिंघल की एक कविता जिसका
शीर्षक है “मेरा राज्य आसाम”:
मेरा राज्य ये
प्यारा,
लगता है न्यारा -
न्यारा,
चारों तरफ
हरियाली लहलहाती,
पक्षी करते हैं
कलरव,
प्रकृति की शोभा
है न्यारी,
अनुपम छटा निराली
!
चारों ओर है चाय
बागान,
लगते जैसे हैं
हरे कालीन,
बांध कतारें
तोड़े पत्तियां,
सुबह की शुरुआत
करते बगानी !
ब्रह्मपुत्र नदी
है विशाल,
मानों गंगा का हो
तीर,
गुवाहाटी में मां
कामाख्या,
नीलांचल के शीश!
भांत - भांत के
व्यंजन स्वादिष्ट,
भांति - भांति के
लोग,
लगता है मानो एक,
मिनी भारत है ओर
!
बिहू है उत्सव
निराला,
ओर कहीं नहीं
मनाया जाता,
रंग - बिरंगी ,सजी - धजी टोली,
बिहू गान है गाती
!
काजीरंगा है
राष्ट्रीय उद्यान,
भारत की साख
बढ़ाता,
एक सींग गैंडें
को देख,
पर्यटक खुश हो
जाता !
"अनेकता में
एकता लिए,
मधुर - मधुर
बोलियों का संगम,
ऐसा है
पूर्वोत्तर का,
आसाम राज्य
मेरा" !
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