Welcome to the Official Web Portal of Lakshyavedh Group of Firms

कविता: पर्वतराज हिमालय (डॉ● दिलीप कुमार झा, हाबड़ा, पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉदिलीप कुमार झा की एक कविता  जिसका शीर्षक है “पर्वतराज हिमालय”:
 
भारत का पहरेदार,
भारत का भाल,
भारत का सरताज
पर्वतराज हिमालय है।
 
भारत का पहरेदार
हिमालय संदेशा देता है -
चीनियों ! अपनी सीमा में सदा रहना
साम्राज्यवादी नीति को छोड़ो,
साम्यवादी नीति से मुह मत मोड़ो।
 
भारत की लक्ष्मणरेखा को पार नहीं करना,
भारत के सैनिकों से कभी नहीं लड़ना।
 
भारत का पहरेदार
पर्वतराज संदेश देता है -
चीनियों! पंचशील की नीति को अपनाओ,
सीमा पर अमन - चैन बनाओ।
 
युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता
अमन चैन में ही विकास का कमल है खिलता।
 
भारत का पहरेदार
पर्वतराज संदेश देता है -
चीनियों ! भारत की सीमा पार नहीं करना,
भारत की सीमा पार करोगे तो होगा मरना,
भारत के सैनिक नहीं छोड़ेंगे,
चीनी सैनिकों की रीढ़ की हड्डियों को तोड़ेंगे,
हाथ से गर्दन मरोड़ेगें।
 
पर्वतराज हिमालय देता है संदेशा -
भारत के वीर जवानों!
कभी न डरना, कभी न झुकना
अचल अमर सदा रहना।

Post a Comment

0 Comments