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कविता: ए दिल मतकर गुस्ताखीयाँ (शैमी ओझा "लफ्ज़", महेसाणा, गुजरात)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार शैमी ओझा "लफ्ज़" की एक कविता  जिसका शीर्षक है “ए दिल मतकर गुस्ताखीयाँ”: 

ए दिल सुन ले मतकर गुस्ताखीयाँ,
मत चल ईश्क की राह पर यारा।
 
जीसे चाहो वो न मिलै जो मिले,
जो मिले ईस दिल को न भाएँ।
 
यही तो दस्तूर है जिदंगी का,
ऐ दिल यह दस्तुर समझ लै जरा।
 
अपने बहकते कदमों को जरा संभल कर रखा करो,
मतलबी लोगों को उनकी औकात बताना शीख ले जरा।
 
ए दिल सुन ले मतकर गुस्ताखीयाँ,
मत चल ईश्क की राह पर यारा।

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