पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार बंदना पंचाल की एक कविता जिसका
शीर्षक है “फिर भर ले आस”:
मत हो निराश, फिर भर ले आस,
अब ना तू डर, चल छोड़ फिकर
जीवन पथ पर तू चलता जा।
कभी मिली जो हार, फिर हो तैयार
सपने आँखो में बुनता जा।
मत अश्रु बहा, है तेरा जहाँ
हर दर्द को अपने मसलता जा।
फिर मिलेगी राह, हो मन में चाह
तू खुद को ना यूँ छलता जा।
आ गा ले गीत, ओ मेरे मीत
नई राहों पर तू सम्भलता जा।


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